कटनी. शहर के बीडी अग्रवाल वार्ड स्थित ऐतिहासिक लल्लू भैया की तलैया की कहानी केवल अतिक्रमण और भराव तक सीमित नहीं है, बल्कि राजस्व रिकॉर्ड में वर्षों तक हुए फेरबदल ने भी इसके अस्तित्व को प्रभावित किया। मिशल बंदोबस्त वर्ष 1907-08 में मूल खसरा नंबर 1318, रकबा 2.60 एकड़ में भूमि के प्रकार कॉलम में स्पष्ट रूप से पानी दर्ज था और कैफियत कॉलम में इसे तलैया बताया गया था। लेकिन बाद के वर्षों में कैफियत कॉलम में हुए बदलावों और प्रशासनिक आदेशों के बीच यह ऐतिहासिक जलस्रोत धीरे-धीरे सिकुड़ता चला गया। आज स्थिति यह है कि करीब 1 लाख 3 हजार वर्गफीट क्षेत्रफल वाली तलैया में केवल लगभग 13 हजार वर्गफीट हिस्सा ही जलस्रोत जैसा दिखाई देता है, जबकि शेष करीब 90 हजार वर्गफीट क्षेत्र मलबे, डस्ट और मुरम से पाट दिया गया है। हाल ही में नगर निगम ने जलगंगा संवर्धन अभियान के तहत तलैया के सौंदर्यीकरण के लिए सफाई और गहरीकरण का कार्य शुरू कराया है, लेकिन कार्रवाई केवल उसी हिस्से तक सीमित है जहां वर्तमान में आकृति दिखाई दे रही है। शनिवार को भी नररनिगम द्वारा तलैया के गहरीकरण व सफाई का कार्य कराया जाता रहा।
