उदयपुर। राजस्थान विधानसभा में “राजस्थान विक्षुब्ध क्षेत्रों में स्थावर संपत्ति के अंतरण का प्रतिषेध तथा परिसरों से किरायेदारों को बेदखली से संरक्षण के लिए उपबंध विधेयक, 2026” पर चर्चा के दौरान राजसमंद विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी ने इसे राज्य में सामाजिक संतुलन, नागरिक सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने वाला दूरदर्शी कानून बताया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक समाज में विश्वास, शांति और सुरक्षित वातावरण बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी ने कहा कि कई बार साम्प्रदायिक तनाव या असुरक्षा की स्थिति में लोग भय और दबाव के कारण अपनी संपत्ति औने-पौने दामों में बेचने को विवश हो जाते हैं। इससे सामाजिक संतुलन प्रभावित होता है और कुछ क्षेत्रों में असंतुलित जनसंख्या परिवर्तन की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ऐसे हालात को रोकने और नागरिकों के संपत्ति अधिकारों की रक्षा के लिए यह विधेयक अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि यह व्यवस्था गुजरात के “डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट” जैसे सफल मॉडल से प्रेरित है। प्रस्तावित कानून के अनुसार, विक्षुब्ध घोषित क्षेत्रों में कलेक्टर की पूर्व अनुमति के बिना स्थावर संपत्ति का अंतरण मान्य नहीं होगा। कलेक्टर यह सुनिश्चित करेगा कि लेन-देन उचित बाजार मूल्य पर और दोनों पक्षों की स्वेच्छा से हो तथा इससे सामाजिक संतुलन प्रभावित न हो।
माहेश्वरी ने कहा कि राजस्थान एक सीमावर्ती राज्य है, इसलिए अनियंत्रित जनसांख्यिक परिवर्तन सामाजिक और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों दृष्टियों से चिंता का विषय हो सकता है। यह विधेयक संभावित ध्रुवीकरण, अवैध दबाव तथा असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर नियंत्रण स्थापित करने में सहायक होगा।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि विधेयक में किरायेदारों को अनुचित या दबावपूर्ण बेदखली से संरक्षण देने का प्रावधान भी शामिल है, जिससे कमजोर और आश्रित वर्गों की आवासीय सुरक्षा सुनिश्चित होगी। अंत में उन्होंने कहा कि यह विधेयक सामाजिक सद्भाव, आर्थिक सुरक्षा और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम है।
