उदयपुर। यूनाइटेड फेडरेशन ऑफ मिनरल प्रोड्यूसर्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने खान एवं भू-विज्ञान विभाग के निदेशक एम.पी. मीणा से मुलाकात की। अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह सोनी, सचिव हितांशु कौशल और कोषाध्यक्ष सौरभ मंत्री ने उन्हें ज्ञापन सौंपकर लंबित खनन पट्टों के विस्तार (एक्सटेंशन) में सकारात्मक सहयोग की मांग की। फेडरेशन ने भरोसा दिलाया कि सभी सदस्य नियमों का पालन कर रहे हैं और कई सदस्यों ने निर्धारित प्रीमियम भी जमा करवा दिया है, फिर भी उनके मामले अभी तक अटके हुए हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने अरावली पर्वतमाला से संबंधित कानूनी पेचीदगियों पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन याचिका और मई 2023 के आदेश के कारण फिलहाल खनन गतिविधियां और पट्टों की अवधि वृद्धि रुकी हुई है। इस संबंध में फेडरेशन ने मांग रखी कि नियमों के अनुसार बंद पड़ी अवधि को “डाईज एंड नॉन” माना जाए और पट्टा धारकों को इस समय का डेड रेंट (किराया) न देना पड़े।
फेडरेशन ने राज्य की अर्थव्यवस्था में खनन के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि अरावली क्षेत्र के मात्र 1 प्रतिशत हिस्से में ही खनन होता है। उन्होंने चेतावनी दी कि पूर्ण प्रतिबंध से अवैध खनन को बढ़ावा मिल सकता है, इसलिए 4 प्रतिशत तक नियंत्रित और वैज्ञानिक तरीके से खनन की अनुमति दी जानी चाहिए। फेडरेशन ने उम्मीद जताई है कि विभाग इन मांगों पर गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ विचार कर जल्द निर्णय लेगा।
