उदयपुर। शिल्पग्राम में रविवार को दस दिवसीय ‘शिल्पग्राम उत्सव’ का शानदार आगाज हुआ। राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे ने अन्य अतिथियों के साथ दीप प्रज्वलित कर और नगाड़ा बजाकर इस सांस्कृतिक मेले की शुरुआत की। इस अवसर पर राज्यपाल बागडे ने कहा कि लोक कला में स्वाभाविकता होती है और यह जीवन का असली प्रकाश है। उन्होंने नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने और बच्चों को कला की शिक्षा देने पर जोर दिया। समारोह में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया भी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए, जिन्होंने इस आयोजन को ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का जीवंत उदाहरण बताया।
समारोह के दौरान लोक कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. कोमल कोठारी स्मृति लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार प्रदान किए गए। इस वर्ष यह सम्मान राजकोट के डॉ. निरंजन वल्लभभाई राज्यगुरु और जयपुर के रामनाथ चौधरी को दिया गया। पुरस्कार के रूप में प्रत्येक कलाकार को 2.51 लाख रुपये और रजत पट्टिका भेंट की गई। रामनाथ चौधरी दुनिया के एकमात्र ऐसे कलाकार हैं जो नाक से अलगोजा बजाते हैं, वहीं डॉ. राज्यगुरु ने लोक और भक्ति संगीत के संरक्षण के लिए व्यापक कार्य किया है। कार्यक्रम में उदयपुर के सांसद मन्नालाल रावत, राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया सहित कई विधायक और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
उद्घाटन समारोह में देशभर की लोक संस्कृतियों का अद्भुत संगम देखने को मिला। दिल्ली के कोरियोग्राफर सुशील शर्मा के निर्देशन में गोवा, मणिपुर, कश्मीर, कर्नाटक और राजस्थान सहित कई राज्यों के लोक नृत्यों की आकर्षक प्रस्तुतियां दी गईं। विशेष आकर्षण ‘कथक और लावणी’ का फ्यूजन रहा, जिसमें शास्त्रीय और लोक नृत्य की जुगलबंदी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके साथ ही राजस्थानी लोक गीतों के मेडले ने अपनी मूल शैली और सुरीली प्रस्तुति से संगीत प्रेमियों की खूब तालियां बटोरीं। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक फुरकान खान ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।
रोचक तथ्य (Facts & Figures):
कोमल कोठारी पुरस्कार का महत्व: यह पुरस्कार राजस्थान के महान लोक संस्कृति विशेषज्ञ कोमल कोठारी की स्मृति में दिया जाता है। इसकी पुरस्कार राशि (2.51 लाख) इसे लोक कला के क्षेत्र में देश के प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक बनाती है।
* शिल्पग्राम का स्वरूप: शिल्पग्राम केवल एक मेला नहीं, बल्कि एक ‘जीवंत संग्रहालय’ (Living Museum) है। यहाँ पश्चिमी भारत (राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा) की ग्रामीण स्थापत्य कला के नमूने झोपड़ियों के रूप में स्थाई तौर पर बने हुए हैं।
रामनाथ चौधरी का विशेष उल्लेख: नाक से अलगोजा बजाना एक दुर्लभ कला है। न्यूज़ में उनके नाम के साथ “विश्व रिकॉर्ड” या “अनोखी प्रतिभा” जैसे शब्दों का सोशल मीडिया पर उपयोग करने से एंगेजमेंट बढ़ सकता है।
आर्थिक संदर्भ: यह 10 दिवसीय उत्सव उदयपुर के पर्यटन और स्थानीय हस्तशिल्पियों के लिए आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होता है, जहाँ देशभर के करीब 400 से अधिक शिल्पकार अपना सामान बेचने आते हैं।
