गोल्ड चोरी की वारदातों को अंजाम दे चुकी गैंग का मास्टरमाइंड बिहार का सुबोध सिंह उर्फ बबुआ राजस्थान पुलिस की गिरफ्त में है। राजसमंद की कांकरोली पुलिस ने उसे करीब दो साल पुराने चर्चित गोल्ड लूट केस में ओडिशा से प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार सुबोध सिंह की गैंग एक दशक में 400 किलो से ज्यादा गोल्ड लूट की वारदातों को अंजाम दे चुकी है। गैंग 6 राज्यों में लूट की वारदात कर चुकी है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… बिहार में नालंदा के चांदी थाने के चिस्तीपुर गांव का रहने वाले ईश्वरप्रसाद कुर्मी के 42 साल के बेटे सुबोध सिंह के खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों में लूट, हत्या और डकैती के 42 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। सुबोध 12वीं पास है। साल 1996 तक वो बिहार के वैशाली जिले के छोटे-मोटे चोरों के साथ वारदातों को अंजाम देता था। साल 1999 आते-आते बिहार में पुलिस का लोकल मुखबिर बन गया। इस दौरान उसका लगातार बिहार एसटीएफ के जवानों और बड़े अफसरों के पास उठना-बैठना भी हो गया। ये काम उसने साल 2007 तक किया। इस दौरान ही सुबोध ने बिहार एसटीएफ और पुलिस की हर स्टाइल और चाल को भी बड़े अच्छे से समझ लिया। सुबोध ने पुलिस को पूछताछ में बताया हैं कि मुखबिरी करते-करते उसका क्रिमिनल नेटवर्क भी बन गया था। उसने 2008 में पहले कोलकाता की आइओबी बैंक और बाद में रायपुर की एक बैंक में डकैती को अंजाम दिया। इन्हीं मामलों में तब पहले कोलकाता पुलिस और बाद में रायपुर पुलिस ने उसे गिरफ्तार भी किया। साल 2015 तक वो रायपुर जेल में बंद रहा। जमानत पर छूटने के बाद उसने मुथूट, मण्णापुरम और बड़े ज्वेलर्स को टारगेट किया। लूट के लिए अपनी गैंग भी बना ली। 2018 में पहली बार एसटीएफ की रडार पर हर वारदात के लिए पूरी प्लानिंग बनाता। साथियों को उनके रोल बांटता था। हर लूट में ये गैंग 15-20 किलो से ज्यादा गोल्ड को लूट लेती थी। साल 2018 आते-आते उसने राजस्थान के जयपुर, महाराष्ट्र के पुणे और नागपुर शहर व पंचिम बंगाल के बैरकपुर में बड़ी गोल्ड लूट की घटनाओं को अंजाम दिया। बिहार के भी कई शहरों में वारदातें की। जनवरी 2018 में बिहार एसटीएफ ने सुबोध को बिहार में वैशाली जिले के दानापुर से उस वक्त गिरफ्तार किया था जब वो प्रेमिका से मिलने आया था। हालांकि, सुबोध ने पुलिस पूछताछ में कहा कि उसे तो सड़क से पकड़ा गया था। उसकी कोई प्रेमिका नहीं थी। उसके पास से तब 16.5 किलो गोल्ड के साथ ही पिस्टल व देसी कट्टा बरामद किया था। उसे पटना की बेउर जेल में भेज दिया गया। वो लंबे समय तक बेउर जेल में ही बंद रहा। वहां से ही अपनी गैंग के मार्फ़त एक के बाद एक गोल्ड लूट की वारदातों को अंजाम देता रहा। जेल में रहकर बढ़ाता रहा गैंग सुबोध सिंह ने जेल में ही नए लोगों को अपनी गैंग से जोड़ना शुरू कर दिया। जैसे ही जेल में चैन स्नैचिंग या चोरी के मामले में कोई अपराधी पकड़ा जाता, सुबोध सिंह और उसके गुर्गे बड़े-बड़े लालच देकर गैंग में जोड़ लेते। बदमाश के तैयार होने के बाद सुबोध उसकी जेल से जमानत करवाता। जब वह जेल से बाहर निकल जाता तो जेल के बाहर के गैंग से जुड़े बदमाश उसे ट्रेनिंग देते और बताते हैं कि कैसे व कहां से गोल्ड लूटना है। सुबोध की गैंग लूटे हुए सोने को नेपाल और पश्चिम बंगाल ले जाती है। यहां गलाने के बाद गोल्ड बेच दिया जाता है। सुबोध का दावा है कि देश में अब तक जितनी भी गोल्ड की लूट हुई है। उसका 70% सोना उसी की गैंग ने लूटा है। सुबोध सिंह जेल में रहते हुए भी अलग–अलग राज्यों में वारदातें करा रहा था। सुबोध सिंह पटना के बेउर जेल में सेक्टर 3 की बैरक 21 और 22 में ही रहा। वहां उसे बड़े आराम से वीआईपी ट्रीटमेंट और लग्जरी सुविधाएं दी जाती थी। इस दोनों बैरक में सुबोध सिंह के गैंग के लोग और उसके जानने वाले लोग ही रहते थे। उसे पहली बार उड़ीसा स्टेट में हुई एक गोल्ड लूट के मामले में पहली बार उड़ीसा पुलिस ने मार्च 2025 में पूछताछ के लिए पकड़ा और अब राजस्थान की कांकरोली पुलिस उड़ीसा से पकड़कर राजस्थान लेकर पहुंची है। राजस्थान के साइबर फ्रॉड मामले के आरोपी पर करवाई थी फायरिंग साल 2020 में राजस्थान के दौसा का एक साइबर फ्रॉड कुणाल शर्मा पटना की बेउर जेल में बंद था। उसे बिहार एसटीएफ किसी केस की इन्वेस्टिगेशन के सिलसिले में ट्रेन से सियालदाह लेकर जा रही थी। इसी दौरान इस उपासना एक्सप्रेस ट्रेन में कुणाल शर्मा पर फायरिंग की गई, हालांकि वो हमले में बच गया और ट्रेन का गार्ड घायल हो गया था। कुणाल से बेउर जेल में बंद सुबोध ने जेल में ही 10 लाख की फिरौती मांगी थी। रकम नहीं मिली तो कुणाल को सियालदह कोर्ट में पेशी के लिए ले जाने के दौरान फायरिंग करवा दी थी। अब इस मामले में कांकरोली पुलिस ने किया गिरफ्तार कांकरोली में भगवानदास मार्केट के सामने स्थित रूपम् गोल्ड ज्वेलर्स में 23 अगस्त 2023 को लूट हुई थी। सुबह साढ़े 10 बजे चार बाइक सवार बदमाशों ने व्यापारी और कर्मचारियों को बंधक बनाकर पिस्टल की नोक पर करीब तीन किलो सोना और 18 लाख रुपए नकद लूट लिए थे। लुटेरों द्वारा इस्तेमाल की गई एक बाइक भी भीलवाड़ा रेलवे स्टेशन के पास से बरामद हुई थी, जो बिहार से चोरी की गई थी। बदमाशों के ट्रेन से बिहार भागने की पुष्टि भी जांच में हुई। इस मामले में पहले पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इससे पहले भी उदयपुर के सुंदरवास में 29 अगस्त 2022 को मणप्पुरम गोल्ड लोन शाखा में हुई बड़ी लूट में भी इसी गैंग का हाथ सामने आया था। इसमें पुलिस 3 बदमाशों को गिरफ्तार कर चुकी है। कांकरोली थाने की सीआई सरोज बैरवा ने बताया कि सुबोध सिंह के खिलाफ दर्ज मामलों में लूटे गए गोल्ड की अनुमानित तादाद करीब 400 किलो से ज्यादा है। इसने कभी भी 25-30 किलो से कम की गोल्ड लूट की कोई वारदात ही नहीं की है।
