भगवान महावीर स्वामी के 2625वें जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर जैनाचार्य जिन मनोज्ञसूरीश्वर महाराज ने उनके जीवन, उपदेशों और वर्तमान समय में उनकी प्रासंगिकता पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में प्रत्येक काल में 24 तीर्थंकर लोक कल्याण के लिए अवतरित होते हैं। इस अवसर्पिणी काल में प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव रहे, जबकि वर्तमान में समस्त जैन समाज महावीर के धर्म शासन काल में जीवनयापन कर रहा है। उन्होंने बताया कि महावीर के सभी उपदेश मानवता के लिए कल्याणकारी हैं, लेकिन आज के वैश्विक परिदृश्य में अहिंसा का सिद्धांत सर्वाधिक प्रासंगिक है।
