पोकरण क्षेत्र के विद्यालयों में मरम्मत कार्य में लापरवाही सामने आ रही है। कई जगहों पर दरारों पर केवल सीमेंट रगड़कर काम पूरा मान लिया गया। कुछ ही दिनों में प्लास्टर झड़ने लगा और सीमेंट उखड़ने लगी, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए। सरकार ने क्षेत्र के 215 विद्यालयों के लिए मरम्मत राशि स्वीकृत की थी। समग्र शिक्षा के अंतर्गत कार्य हुए, लेकिन निगरानी कमजोर रही। कथित तौर पर घटिया सामग्री और जल्दबाजी में किए गए काम के कारण मरम्मत टिक नहीं पाई। धोलिया गांव स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में स्थिति अधिक चिंताजनक है। करीब 1.96 लाख रुपए खर्च होने के बावजूद एक माह में ही छत और कमरों की दीवारों की परतें उखड़ने लगीं। छत पर पतली जाली डालकर सीमेंट का घोल चढ़ाया गया, जो जल्दी ही टूटने लगा। कमरों की दरारों पर की गई लीपापोती भी खुलने लगी। विद्यालय प्रबंधन समिति अध्यक्ष प्रदीप गोदारा ने बताया कि चार दिन में चार कक्षों की मरम्मत पूरी कर दी गई, लेकिन गुणवत्ता नहीं रखी गई। अब छतों से सीमेंट गिरने और दीवारों में दरारें बढ़ने से विद्यार्थियों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। आगामी बारिश में हालात और बिगड़ने की आशंका है। छतों से पानी रिसाव और मलबा गिरने से बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद जिम्मेदार स्तर पर सुधार के ठोस प्रयास नजर नहीं आ रहे।
