शो-पीस बना वॉटर फिल्टर: प्यास से हलाकान यात्री, व्यवस्थाओं के नाम पर अधिकारियों का निरीक्षण वाला छलावाशहडोल. बस स्टैंड प्रतिदिन 1000 से 1500 यात्रियों की आवाजाही का प्रमुख केंद्र है, लेकिन यहां की बदहाली किसी त्रासदी से कम नहीं है। गर्मी के शुरुआती दौर में ही यहां यात्रियों को शुद्ध पेयजल की एक बूंद तक नसीब नहीं हो रही है। नगरपालिका द्वारा लाखों का टैक्स और पार्किंग शुल्क वसूलने के बावजूद, यहां बनी पेयजल यूनिटें बरसों से जर्जर और गंदगी का शिकार हैं। वॉटर फिल्टर महज शो-पीस बनकर रह गए हैं। जिम्मेदारों के निरीक्षण सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित हैं, जिसके चलते यात्री पानी की महंगी बोतलें खरीदने को मजबूर हैं। बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर हो चुका यह बस स्टैंड, प्रशासनिक उदासीनता पोल खोलने के लिए काफी है। बीते दिनों यहां अधिकारियों ने निरीक्षण भी किया, लेकिन यात्रियों की परेशानी नजर नहीं आई।
