जस्थान के सीमावर्ती रेगिस्तानी जिले बाड़मेर-जैसलमेर अब एक खतरनाक मोड़ पर खड़े हैं। जहां कभी तस्करी सीमित स्तर पर थी, वहीं अब सुनसान धोरों और ढाणियों में ङ्क्षसथेटिक ड्रग एमडी (मेफेड्रोन) की अवैध फैक्ट्रियां पकड़े जाना बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है। बाड़मेर में पिछले सात महीनों में लगातार हुई कार्रवाई में सामने आया है कि रेगिस्तान अब सिर्फ ट्रांजिट रूट नहीं, बल्कि ड्रग्स मैन्युफैक्चङ्क्षरग हब बनता जा रहा है। यदि समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो यह जाल युवाओं के भविष्य को पूरी तरह जकड़ सकता है। रेगिस्तान की भौगोलिक स्थिति यह है कि कम आबादी, दूर-दराज ढाणियां, सीमावर्ती क्षेत्र और पुलिस की सीमित पहुंच के बीच तस्करों के लिए मुफीद साबित हो रही है। कच्चे मकानों, टिनशेड और खेतों के बीच अस्थायी लैब बनाकर केमिकल से एमडी तैयार की जा रही है, जिसे बाद में बड़े शहरों में सप्लाई किया जाता है।
