बाड़मेर में जमीन विवाद में घायल तीन लोग मंगलवार को स्ट्रेचर, व्हीलचेयर पर और गोद में एसपी ऑफिस पहुंचे। उन्होंने एसपी से आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग की। कलेक्ट्रेट स्थित एसपी ऑफिस में स्ट्रेचर पर लेटे घायल ने कहा- वो (हमलावार) नकाब पहने थे और हाथों में हथियार थे। उन्होंने सरियों से बुरी तरह मारपीट की। इसके बाद एसपी नरेंद्र मीना ने मौके से ही जांच अधिकारी ASP निरंजन आर्य को फोन लगाया। कहा- इतनी बुरी तरह मारपीट की है। इस मामले के बाकी मुल्जिम (आरोपी) 2 दिन में उठाओ। इनको जान से ही मारेंगे क्या? बाकी के आदमी तुरंत उठाना। जमीन को लेकर भिड़े थे दो पक्ष दरअसल, बाड़मेर के धनाऊ थाना इलाके के आलमसर गांव में 1 जनवरी की रात को जमीन विवाद में दो पक्ष भिड़ गए थे। इसमें एक पक्ष केवाराम पुत्र फोटाराम निवासी दीनगढ़ और दूसरा पक्ष मूलाराम पुत्र दूदाराम निवासी दीनगढ़ हैं। केवाराम पक्ष के रामाराम (61), खेराज (50) और फोटाराम (60) के गंभीर चोटें आईं। वहीं दूसरे पक्ष के दो लोगों को मामूली को चोटें आईं। रामाराम, खेराज और फोटाराम को बाड़मेर में प्राथमिक इलाज के बाद जोधपुर रेफर कर दिया गया। वहां पर इलाज चला। दोनों पक्षों के 10 लोग गिरफ्तार इधर, पुलिस ने दोनों पक्षों की रिपोर्ट पर मामला दर्ज किया। केवाराम पक्ष की ओर से एससी-एसटी एक्ट और मारपीट की धारा में FIR दर्ज करवाई गई। वहीं मूलाराम पक्ष ने मारपीट समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज करवाया। पुलिस ने जांच कर केवाराम पक्ष के 4 और मूलाराम पक्ष के 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामले की जांच डीएसपी चौहटन जेठाराम कर रहे थे। अब जांच ASP नितेश आर्य को सौंपी गई है। विवाद के कारण जमीन को कुर्क कर दिया गया है। हाथ-पैर पर पट्टी बंधी, पैरों में फ्रैक्चर मंगलवार को कलेक्ट्रेट स्थित एसपी ऑफिस पर घायल रामाराम, फोटाराम और खेराज पहुंचे। व्हीलचेयर पर बैठे रामाराम के हाथ-पैर पर पट्टी बंधी थी। खेराज स्ट्रेचर पर था। उसके पैरों में फ्रैक्चर है। वहीं फोटाराम के सिर पर पट्टी बंधी थी। जोधपुर के हॉस्पिटल से छुट्टी मिलने के बाद तीनों यहां ग्रामीणों और परिजनों के साथ पहुंचे थे। यहां उन्होंने एसपी नरेंद्र सिंह मीना और एसडीएम यशार्थ शेखर से मुलाकात की। एसपी बोले- एक से चला नहीं जा रहा एसपी नरेंद्र सिंह मीना ने ASP निरंजन आर्य को फोन लगाया और कहा कि ये गरीब लोग हैं। इनको बुरी तरह पीटा है। 3 बुजुर्ग लोग हैं। एक के हाथ पर पट्टी बंधी है, एक से चला नहीं जा रहा है। ये भी जांच करना कि धनाऊ SHO ने 307 में मुकदमा दर्ज किया है या नहीं। दलित नेता उदाराम मेघवाल ने बताया कि इस संबंध में पहले धनाऊ इंचार्ज को रिपोर्ट दी गई थी। उसको नजर अंदाज करते हुए अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया। गंभीर धाराएं नहीं लगी। सीईओ चौहटन ने जब जांच की तो उन्होंने गंभीर धाराएं शामिल की।
