जयपुर में स्टोन इंडस्ट्री का सबसे बड़ा महाकुंभ ‘इंडिया स्टोनमार्ट-2026’ चल रहा है। जयपुर एग्जीबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर (JECC) में देशभर से मूर्तिकार पहुंचे हैं। मेगा प्रदर्शनी में 539 स्टॉल लगे हैं। एक स्टॉल पर कदम वृक्ष के नीचे राधा-कृष्ण की रासलीला करती मूर्ति है। मूर्ति के नीचे भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोपियों के साथ वस्त्र हरण और गिरी गोवर्धन को दर्शाया गया है। भगवान विष्णु का कूर्म अवतार (कछुआ) भी शोकेस किया गया है, जिसमें आगे भगवान विष्णु को दिखाया गया है और पीछे उनके चरण दर्शाए गए हैं। इस मूर्ति की कीमत 12 लाख रुपए है। प्रदर्शनी में हवा महल भी शोकेस किया गया है, जो कि आगरा रेड सेंडस्टोन से बना है। इसे बनाने में 8 कारीगरों को 6 महीने लगे थे। जिसकी कीमत 13 लाख रुपए है। इसे दीवारों को खूबसूरत बनाने के लिए होटल, रिसॉर्ट और घर के हॉल की दीवारों पर सजाया जा सकता है। वहीं, मूर्ति के माध्यम से शिव तांडव को दर्शाया गया है। 1. पिंक पत्थर से बनी राधा-गोविंद की रासलीला की मूर्ति, कीमत 18 लाख ओडिशा के जगन्नाथपुरी से आए मूर्तिकार राजेंद्र मिश्रा ने बताया- मेरे पास पिंक पत्थर की एक से बढ़कर मूर्तियां हैं। इनमें सबसे खूबसूरत कदम वृक्ष के नीचे राधा कृष्ण की रास लिला करती मूर्ति है। मूर्ति के नीचे कृष्ण द्वारा जो गोपियों के साथ वस्त्र हरण और गिरी गोवर्धन को दर्शाया गया है। राजेंद्र मिश्रा ने बताया- इसको बनाने में मेरे सहित 8 कारिगरों को करीब डेढ़ साल का समय लगा था। इसको बनाने में ओडिशा के पिंक स्टोन का उपयोग किया गया है। इस मूर्ति को बनाने में 12 लाख से ज्यादा का खर्चा आया था। मूर्ति की कीमत 18 लाख रखी गई है 2. भगवान विष्णु का कूर्म अवतार, 2 साल में बनी मूर्ति मूर्तिकार राजेंद्र मिश्रा ने आगे बताया- मेरे पास भगवान विष्णु के कूर्म अवतार (कछुआ) की भी मूर्ति है। इसमें आगे भगवान विष्णु को दिखाया गया है और पीछे उनके चरण दर्शाए गए हैं। इसके ऊपर समुद्र मंथन को दर्शाया गया है, जिसमें एक तरफ देवताओं को और दूसरी तरफ असुरों को दर्शाया गया है। वहीं, देवासुर संग्राम को भी दर्शाया गया है। इसी पर दशावतार में जो भी हुआ था, उसे बारीकी से दर्शाया गया है, जिसे इसके चारों पैरों में दर्शाया गया है। इसमें चावल से भी छोटी साइज की मूर्तियां उकेरी गई हैं। इसे बनाने में 2 साल लगे हैं। इसे कारीगरों ने हाथों से ही बनाया है। इसे भी पिंक स्टोन पर बनाया गया है, क्योंकि मशीन से बनाना संभव नहीं है। मूर्ति की कीमत 12 लाख है। इस कला के लिए उन्हें राष्ट्रपति से भी सम्मान मिल चुका है। 3. मूर्ति के माध्यम से शिव तांडव को दर्शाया
जयपुर के मूर्तिकार नवीन शर्मा ने बताया- स्टोनमार्ट में ब्लैक मार्बल की शिव तांडव की मूर्ति भी शोकेस की गई है। इसे बनाने में करीब 20 कारीगरों को 7 से 8 महीने लगे है। यह ब्लैक मार्बल में मेसलाना माइंस के पत्थर से बनाई गई है। इस मूर्ति के माध्यम से शिव तांडव को दर्शाया गया है, जो कि अलग कला को प्रदर्शित करती है क्योंकि यह मूर्ति सामान्य शेप से अलग दिखाई देती है। मूर्ति की कीमत 9 लाख रखी गई है।
4. गणेश जी की 11 लाख रुपए की मूर्ति
नवीन शर्मा ने आगे बताया कि 5 फीट की सफेद गणेश जी की मूर्ति भी शोकेस की। यह मूर्ति वियतनाम मार्बल से बनाई गई है। इसे बनाने में करीब 3 महीने लगा था। इस पत्थर का दाना काफी बारीक होता है, जिससे इसमें कारीगरी निखर कर आती है। इस मूर्ति की कीमत 11 लाख रुपए रखी गई है।
5. अफ्रीकन स्टोन मैलाकाइट से बना कंसोल और बाथटब जयपुर के रामगढ़ मोड़ निवासी आजम खान ने बताया कि ‘इंडिया स्टोनमार्ट’ में उन्होंने अफ्रीकन स्टोन मैलाकाइट से बना कंसोल और बाथटब शोकेस किया। ये दोनों अफ्रीकन स्टोन मैलाकाइट से बने है। आजम खान ने बताया कि यह उनका पुश्तैनी कारोबार है और यह उनकी तीसरी पीढ़ी इस काम को कर रही है। उनके परदादा हाजी मोहम्मद हुसैन ने इटालियन पेत्राडुरा से प्रभावित होकर काम की शुरुआत की थी। आजम खान के भाई मोहम्मद असलम ने बताया- स्टोन मार्ट में कई कलाओं को शोकेस किया है, जिनमें अफ्रीकन स्टोन मैलाकाइट से बना कंसोल शोकेस किया गया है। इसको और खूबसूरत बनाने के लिए गोल्ड का प्रयोग किया गया है। इसको बनाने में 6 कारीगरों को 4 महीने लगे। इसको तैयार करने में तकरीबन 7.5 लाख रुपए का खर्चा आया था और अब इसको बेचने के लिए ₹9 लाख की कीमत रखी गई है। वहीं, इसके साथ अफ्रीकन स्टोन मैलाकाइट से बना बाथटब की कीमत 10 लाख रुपए है। 6. आगरा रेड सेंडस्टोन से बना हवा महल मोहम्मद असलम ने बताया- प्रदर्शनी में आगरा रेड सेंडस्टोन से बना हवा महल भी शोकेस किया गया, जिसे बनाने में 8 कारीगरों को 6 महीने लगे थे। इसकी कीमत 13 लाख रुपए है। इसे दीवारों को खूबसूरत बनाने के लिए होटल, रिसॉर्ट और घर के हॉल की दीवारों पर सजाया जा सकता है। 7. मकराना मार्बल की बणी-ठणी जयपुर के दुर्गापुरा निवासी पंकज प्रजापत ने बताया- वे स्टोनमार्ट में बणी-ठणी को शोकेस कर रहे हैं। इसे पहले मिट्टी का मॉडल बनाया जाता है, इसके बाद पीओपी में डाला जाता है। फिर कम्पास के माध्यम से मकराना मार्बल से बनाया जाता है। 18 इंच की साइज में इसको बनाने में करीब 40 दिन लग जाते हैं। फिर दो कारीगर इसकी घिसाई और पॉलिश का काम करते हैं। इसके बाद कलर कॉम्बिनेशन का काम होता है। इसकी जो ओढ़नी है, उसमें पीला रंग दिया जाता है। इसे शेड के हिसाब से दिया जाता है, जिसमें देखा जाता है कि कहां कलर डार्क देना है और कहां कलर को हल्का रखना है। आंखें हमेशा लाइट शेड पर बनानी होती हैं। इसके बाद इस पर आंखें बनाई जाती हैं, फिर गोल्डन का वर्क किया जाता है। इसकी कीमत 48 हजार रुपए है। पंकज प्रजापत ने बताया- पुराने कल्चर में औरतें घूंघट ओढ़ कर रहती थीं। आज के दौर में शायद वो कल्चर खत्म हो गया है। उसको बरकरार रखने के लिए ये आर्ट काफी खूबसूरत है। पंकज प्रजापत तीसरी पीढ़ी हैं जो लगातार यह काम को कर रही है। पंकज प्रजापत के दादा अर्जुन प्रजापति को बणी-ठणी के लिए राष्ट्रपति पदक मिल चुका है। अब देखिए, इंडिया स्टोनमार्ट से जुड़ी PHOTOS… ——– इंडिया स्टोनमार्ट 2026 से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… मुख्यमंत्री बोले- कांग्रेस राज में थम गया था विकास:इंडिया स्टोनमार्ट 2026 का उद्घाटन, CM ने पुराने श्रमिकों की घटती संख्या पर जताई चिंता
भारत की प्राकृतिक पत्थर (नेचुरल स्टोन) इंडस्ट्री को वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से 13वें इंडिया स्टोनमार्ट 2026 का शुभारंभ गुरुवार को जयपुर में हो गया है। यह आयोजन 5 से 8 फरवरी तक एग्ज़ीबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर (JECC), सीतापुरा में आयोजित किया जा रहा है। चार दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी और उद्योग संवाद का उद्घाटन मुग्धा कन्वेंशन हॉल में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने किया। (पढ़ें पूरी खबर)
