कानपुर में सात दिनों तक चलने वाले होली उत्सव का मंगलवार को ऐतिहासिक गंगा मेला के साथ भव्य और रंगीन समापन हुआ। सुबह से ही शहर की गलियां गुलाल, अबीर और ढोल-नगाड़ों की गूंज से सराबोर नजर आईं। हुरियारों की टोलियां नाचते-गाते सड़कों पर उतरीं तो पूरा शहर फागुन के उल्लास में डूब गया। हर तरफ रंगों की बारिश और होली के गीतों की गूंज सुनाई देती रही।इस बार गंगा मेला के जुलूस में खास बदलाव भी देखने को मिला। वर्षों पुरानी भैंसा ठेला परंपरा की जगह ट्रैक्टर-ट्रॉलियां, ऊंट और घोड़े शामिल किए गए। करीब छह ऊंट, पांच घोड़े और आठ ट्रैक्टरों के काफिले के साथ निकली टोलियों ने पूरे शहर में उत्साह का माहौल बना दिया। जुलूस जहां-जहां से गुजरा, वहां लोग रंग और गुलाल उड़ाकर होली का जश्न मनाते नजर आए।
