बाड़मेर जिले के शिव से विधायक रविंद्र सिंह भाटी गुरुवार रात ओरण बचाओ पदयात्रा में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने पर्यावरण प्रेमी सुमेरसिंह को अपने कंधों पर बैठाकर 1 किलोमीटर तक पैदल चले। विधायक ने जोधपुर के बालेसर में पदयात्रियों के साथ ही रात भी गुजारी। भाटी ने कहा – एक रात घर से बाहर रहने पर फोन आ जाता है, लेकिन 32 दिन सबकुछ छोड़कर बैठना आसान नहीं। मैं किसी पार्टी में नहीं हूं। न बीजेपी ने कुछ दिया न कांग्रेस ने। सच के लिए आंख से आंख मिलाकर बात करनी पड़ेगी। मैं किसी का विरोधी नहीं, जो सही है वही कहता हूं। यह संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए है। तनोट से जयपुर तक 725 KM की पदयात्रा जैसलमेर स्थित तनोट माता मंदिर से 21 जनवरी को शुरू हुई ओरण बचाओ पदयात्रा गुरुवार रात को जोधपुर के बालेसर पहुंची। जहां चामुंडा माता मंदिर में रात्रि विश्राम किया गया। यह पदयात्रा सुमेर सिंह और भोपाल सिंह के नेतृत्व में जयपुर की ओर बढ़ रही है। पूरी यात्रा में लगभग 725 किलोमीटर दूरी तय की जाएगी। यात्रा में 10 साल के बच्चों से लेकर 75 साल तक के बुजुर्ग शामिल हैं। पदयात्रा का उद्देश्य ओरण भूमि को ‘विकास’ के नाम पर खत्म होने से बचाना है। स्थानीय लोग इसे पूर्वजों की विरासत और पर्यावरण संरक्षण का आधार मानते हैं। 32 दिन धरने पर बैठना हंसी-खेल नहीं पदयात्रा के दौरान विधायक भाटी ने कहा – आपने 22 दिनों से यात्रा को करीब से देखा है। इससे पहले 32 दिन तक जैसलमेर कलेक्ट्रेट के आगे धरना दिया गया था। यह धरना ओरण, गोचर और आगौर बचाने के लिए था।75 वर्षीय कल्याणसिंह जैसे बुजुर्ग भी करीब 350 किलोमीटर पैदल चल चुके हैं। ओरण क्या है और क्यों हो रहा आंदोलन? ओरण ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक संरक्षित वनभूमि होती है, जहां पशुओं के लिए चारा, जल स्रोत और जैव विविधता सुरक्षित रहती है। स्थानीय समुदाय इसे धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर मानते हैं।
पदयात्रियों का आरोप है कि विकास परियोजनाओं के कारण यह जमीन लगातार खत्म हो रही है, इसलिए इसे बचाने के लिए जनआंदोलन चलाया जा रहा है। बालेसर में पदयात्रियों संग बिताई रात विधायक ने गुरुवार रात पदयात्रा कर रहे पर्यावरण प्रेमियों के साथ जमीन पर ही रात बिताई। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ जमीन नहीं बल्कि संस्कृति, पर्यावरण और भविष्य बचाने का प्रयास है।
