उदयपुर। पेसिफिक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पिम्स), उमरड़ा में चिकित्सकों ने बिना ओपन हार्ट सर्जरी के हृदय का छेद बंद कर चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। अस्पताल में एक महिला का सफल इलाज चिरंजीवी योजना के तहत निशुल्क किया गया। कार्डियोलॉजी विभाग के डॉ. महेश जैन और उनकी टीम ने हृदय के जन्मजात छेद (एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट) को एएसडी डिवाइस क्लोजर तकनीक से बंद किया। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, सामान्यतः जन्म के कुछ समय बाद हृदय की दो चैम्बर्स के बीच की झिल्ली स्वतः बंद हो जाती है, लेकिन कुछ मामलों में यह मार्ग खुला रह जाता है, जिसे आम बोलचाल में “दिल में छेद” कहा जाता है। इस स्थिति में मरीज को तेज चलने, सीढ़ियाँ चढ़ने या श्रम करने पर सांस फूलने, चक्कर आने और कमजोरी महसूस होने की शिकायत रहती है। डॉ. महेश जैन ने बताया कि एएसडी डिवाइस क्लोजर एक आधुनिक तकनीक है जिसमें छतरीनुमा डिवाइस के माध्यम से बिना चीरफाड़ के दिल के छेद को बंद किया जाता है। इस प्रक्रिया में एनेस्थेसिया विशेषज्ञ डॉ. विपिन सिसोदिया और सीटीवीएस सर्जन डॉ. विवेक रावत ने भी अहम भूमिका निभाई।
पिम्स में बिना ओपन सर्जरी हृदय का छेद बंद, मरीज को नई जिंदगी मिली
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