उदयपुर। जिन्होंने गरीबों के आशियाने तोड़े, आज वही उन गरीबों के हित की बात कर रहे हैं। यह तो वही हुआ कि अपराधी ही जज और वकील बन बैठे! यह विचार माकपा जिला सचिव और पूर्व पार्षद राजेश सिंघवी ने बलीचा में गरीबों के मकान तोड़े जाने पर मौके पर जाकर पीड़ितों के सामने व्यक्त किये! उन्होंने कहा कि सत्ताधारी और अधिकारी कहते हैं कि ” जमीन गरीब के बाप की नहीं है, तो हम भी उन्हें यह कहना चाहते हैं कि जमीन अगर गरीबों के बाप की नहीं है तो यह किसी के भी बाप की नहीं है और प्रकृति द्वारा बनाई जमीन पर हर जीव का हक है” । इस अवसर पर माकपा राज्य कमेटी के सदस्य विमल भगोरा ने कहा कि आज से 50 वर्ष पहले देवाली में नगर विकास पृन्यास ने एक गरीब का झोपड़ा तोड़ा था तो उसके जवाब में लाल झंडे ने जनता की एकता और संगठन का निर्माण कर उदयपुर के चारों ओर गरीबों की आवास दिलाने की लड़ाई लड़ आवास दिलाए। उन्होंने कहा कि लाल झंडा आज भी यह लड़ाई लड़ने को तैयार है। माकपा शहर सचिव हीरालाल सालवी ने कहा कि सत्ताधारी पार्टी के नेता और जनप्रतिनिधि गरीबों पर कोई भी हमले होने पर उसका जिम्मेदार अधिकारियों को बता अपना पल्ला जाड़ लेते हैं, तो हम उनसे पूछना चाहते हैं कि वह नेता सिर्फ भजन कीर्तन करने के लिए ही बने हैं। उन्होंने कहा कि अगर अधिकारी बेलगाम है तो इसका मतलब है कि नेता किसी काम के नहीं है, वह सिर्फ बयानबाजी कर इतिश्री कर लेते हैं। इस अवसर पर निर्माण मजदूर एकता यूनियन के नेता शमशेर खान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक तरफ तो देश के हर नागरिक को आवास देने की घोषणा करते हैं, वहीं उनके चेले गरीबों के आवास पर आए दिन बुलडोजर चला रहे हैं। इस अवसर पर माकपा ने पीड़ितों को विश्वास दिलाया कि माकपा इस दु:ख की घड़ी में उनके साथ है और आवास के अधिकार की लड़ाई में हर कुर्बानी देने को तैयार है।
अपराधी ही जज और वकील बने
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