बुंदेलखंड का गौरव कहा जाने वाला छतरपुर का ग्रेनाइट उद्योग आज अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार के बदलते समीकरण और स्थानीय स्तर पर संसाधनों के अभाव ने इस फलते-फूलते कारोबार की कमर तोड़ दी है। कभी जिले की आर्थिक मजबूती का आधार रहे इस उद्योग की हालत यह है कि यहां की 47 चिह्नित खदानों में से अब केवल 4 ही किसी तरह संचालित हो पा रही हैं, जबकि शेष खदानें या तो बंद हो चुकी हैं या वहां उत्पादन पूरी तरह ठप पड़ा है। जानकारों के मुताबिक, कभी करोड़ों का टर्नओवर देने वाला यह कारोबार अब सिमटकर महज एक चौथाई ही बचा है।
