बीना. शहर के महाविद्यालयों में पिछले कुछ वर्षों से सभी संकायों की सीटें नहीं भर पा रही हैं। सीटें भरने के लिए महाविद्यालय प्रबंधन कई अभियान चला रहे हैं और प्रवेश लेनेे के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया जा रहा है। इसके बाद भी साल दर साल प्रवेशों में कमी आ रही है। इसका एक कारण कौशल विकास आधारित पाठ्यक्रमों की ओर बढ़ता रुझान भी बताया जा रहा है।जानकारी के अनुसार बीए, बीएससी, बीकॉम जैसे पारंपरिक पाठ्यक्रमों में पहले जहां भारी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती थी और सीटें बढ़ानी पड़ती थी, लेकिन अब जो सीटें हैं वह भी नहीं भर पा रही हैं। बीए संकाय में तो सीटें कुछ हद तक भर जाती हैं, लेकिन कॉमर्स की सीटें ज्यादा खाली रहती हैं। बीए संकाय में प्रवेश लेकर विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने दूसरे शहरों में चले जाते हैं। साथ ही अब विद्यार्थी केवल डिग्री नहीं, बल्कि जॉब रेडी स्किल चाहते हैं। वह ऐसे कोर्स चुन रहा है, जिनसे सीधे रोजगार या स्वरोजगार के अवसर मिल सकें। स्थानीय उद्योगों से संबंधित कोर्स या प्रशिक्षण केन्द्र शहर में नहीं है, जिससे दूसरे शहरों में ही जाकर पढ़ाई करनी पड़ती है।
