देश का सबसे बड़ा परीक्षा तंत्र फिर ध्वस्त हो गया। लाखों युवाओं की मेहनत, परिवारों की जमा-पूंजी और वर्षों के सपनों पर एक बार फिर दलालों, अफसरों और संगठित माफिया ने डाका डाल दिया। नीट परीक्षा रद्द हो गई। इसका स्वागत है, मगर क्या केवल परीक्षा रद्द कर देने से अपराध धुल जाता है? सच्चाई यह है कि पर्चा लीक अब उद्योग बन चुका है। ऐसा उद्योग, जिसमें जोखिम कम है, मुनाफा बेहिसाब है और सजा लगभग शून्य। जांचें होती हैं, गिरफ्तारियां होती हैं, प्रेस कॉन्फ्रेंस सजती हैं, चेहरे टीवी पर चमकते हैं… मगर मिलती है …. तारीख पर तारीख, जमानत और अगला पर्चा लीक।
