बांसवाड़ा में पुरानी रंजिश में 'खून का बदला खून':ढाई सौ आदिवासी बेघर हुए, बोले- हमें घरों से भगाया, भूखे मरने की नौबत आई - Mewar App

बांसवाड़ा में पुरानी रंजिश में ‘खून का बदला खून’:ढाई सौ आदिवासी बेघर हुए, बोले- हमें घरों से भगाया, भूखे मरने की नौबत आई

बांसवाड़ा में एक साल पहले हुए खूनी संघर्ष के बाद 8 आरोपियों के करीब ढाई सौ परिजन बेघर हो चुके हैं। गांव जाने पर परिवारों को दूसरे पक्ष की ओर से धमकी दी जा रही है। साथ ही ‘खून का बदला खून’ कहकर धमकाया जा रहा हैं। दरअसल, पूरा मामला नवंबर 2024 में धनतेरस के पर्व पर हुए विवाद से जुड़ा है। इसके तहत आंबापुरा तहसील के अनपुरा गांव में पिछले साल 2024 में धनतेरस पर 2 पक्षों के बीच गाली-गलौज के बाद विवाद बढ़ गया और खूनी संघर्ष हुआ। इसमें गांव के ही रितेश पिता छगन की मौत हो गई। इस संबंध में आंबापुरा थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था, जिसमें 8 लोगों को जेल भेजा गया। फिलहाल 5 लोग जेल से छूटकर वापस आ चुके है। जबकि 3 अभी भी जेल में बंद है। मामला फिलहाल कोर्ट में विचाराधीन है। इस दौरान आज आरोपियों के परिजनों ने एसपी को ज्ञापन सौंपा। साथ ही गुहार लगाई कि उनके परिवार को गांव में बने अपने घरों में सुरक्षित रहने दिया जाना चाहिए। एसपी को दी 58 लोगों के खिलाफ नामजद
बेघर परिवारों ने 58 लोगों के खिलाफ नामजद शिकायत सौंपी है। इनमें कनकमल पिता प्रभु निनामा, शारदा पत्नी कनकमल निनामा, मनीष पिता प्रभु निनामा, बबली पत्नी मनीष, प्रभु पिता दला, मांगु पिता प्रभु, कल्पेश पिता कनकमल, रकमा पिता रामा, मेघा पत्नी रकमा सहित 58 लोग शामिल है। आरोप लगाया कि यह लोग मारपीट करते है। डराते- धमकाते है। घरों में तोड़फोड़ करते हैं। इसके कारण 8 आरोपियों के परिवार अपना घर छोड़कर दूसरे रिश्तदारों के पास रहने को मजबूर हैं। एक करोड़ रुपए का मुआवजा मांग रहे
एसपी ऑफिस आए पप्पू, प्रकाश, सोहन, सुरेश, रमेश, दिनेश, कान्ति, परतु, विठला, लक्सी, राजू, अल्पेश, अनिल, जसवंत और नगीन सहित लगभग कई लोगों ने अपना दर्द बयां किया। उन्होंने बताया कि एक साल से डर के मारे दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। उनका आरोप है कि सामने वाले लोग संख्याबल में अधिक होने से उनके घरों, खेतों और मवेशियों पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। वे पीड़ितों से एक करोड़ रुपए की मांग कर रहे हैं। गांव के आस-पास दिखने पर हथियारों से मारने के लिए दौड़ते हैं। पीड़ित परिवारों का कहना है कि हाल ही में 19 अक्टूबर को परिवार के सदस्य अनिल को बाजार में अकेला पाकर अभियुक्त कनकमल और उसकी पत्नी शारदा ने मारपीट भी की। लोगों ने बीच-बचाव कर उसे बचाया। आदिवासी किसान बोले- भूखे मरने की स्थिति आ गई
पीड़िता ने बताया- आदिवासी किसान परिवारों की आजीविका का एकमात्र स्रोत खेती है, लेकिन गांव से बाहर निकाले जाने के कारण उनके सामने भूखे मरने की स्थिति पैदा हो गई है। लगभग 250 लोगों के बेघर होने के कारण परिवारों में रहने वाले बच्चों की पढ़ाई और पालन-पोषण पर भी बुरा असर पड़ रहा है। एसपी से मांग की है कि इन लोगों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्यवाही की जाए। घरों से लूटा गया सामान बरामद किया जाए और पुलिस संरक्षण में उन्हें वापस अपने घरों में सुरक्षित रहने की व्यवस्था की जाए। ये लोग जेल से छूटकर आए, अब परिवार के साथ खा रहे ठोकरें
अनपुरा निवासी पप्पु पिता रायचन्द निनामा, प्रकाश पिता विरजी निनामा, रमेश पिता वीरजी निनामा, राजू पिता शंकर निनामा, अनिल पिता देवचंद निनामा जेल से छूटकर आए हैं। थानाधिकारी बोले- दोनों पक्षों को पाबंद किया है
आंबापुरा थानाधिकारी जीवतराम का कहना है कि विवाद एक साल पहले हुआ था। फिलहाल पीड़ित लोगों ने एसपी को शिकायत दर्ज करवाई है। मामले की जांच की जा रही है। वहीं दोनों पक्षों को पाबंद किया गया है।