उदयपुर। राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय में सोमवार को सुश्रुत सभागार में बीएएमएस प्रथम वर्ष के नए विद्यार्थियों के लिए वेदारंभ संस्कार का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम नीट चयनित शैक्षणिक सत्र 2025 के विद्यार्थियों के प्रवेश दिवस पर हुआ। प्राचार्य प्रो. अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि वेदारंभ संस्कार भारतीय संस्कृति के 16 प्रमुख संस्कारों में से एक है, जो शिक्षा के आरंभ का प्रतीक है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एडीएम (प्रशासन) दीपेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि आने वाली शताब्दी आयुर्वेद की होगी। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद और योग निरापद चिकित्सा पद्धतियां हैं, जो स्वस्थ व्यक्ति के लिए भी हितकारी और रोगी के लिए भी लाभकारी हैं। इस अवसर पर संयोजक डॉ. किशोरी लाल शर्मा ने महाविद्यालय के इतिहास, उपलब्धियों और शैक्षणिक परंपराओं की जानकारी दी। कार्यक्रम में नवप्रवेशी विद्यार्थियों को महर्षि चरक शपथ दिलाई गई और यज्ञ का आयोजन कर वैदिक परंपरा का पालन किया गया। महाविद्यालय के शिक्षक, वरिष्ठ विद्यार्थी और नवागंतुक छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की। बैच 2024 के विद्यार्थियों ने नए बैच का स्वागत करते हुए स्मृति चिह्न भेंट किए। अंत में शैक्षणिक प्रभारी प्रो. कमलेश कुमार शर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया।
आयुर्वेद महाविद्यालय में वेदारंभ संस्कार, नव छात्रों ने ली महर्षि चरक शपथ
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